छठ पूजा सूर्य देव को समर्पित महापर्व है। यह बिहार का सबसे बड़ा त्योहार है जो पूरे विश्व में मनाया जाता है।
छठ पूजा बिहार का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़ा त्योहार है जो सूर्य देव के सम्मान में मनाया जाता है। यह पूजा चार दिनों तक चलती है और इसमें विशेष रूप से नदियों या तालाबों के किनारे पर स्थापित घटों में सूर्य की पूजा की जाती है।
इस पूजा की विशेषता यह है कि यह दिन के चारों ओर चलती है - दोपहर, सुबह, शाम और रात। पूजा के दौरान भक्त नदी के किनारे पर खड़े होकर सूर्य को प्रार्थना करते हैं। यह एक ऐसा त्योहार है जो पूरे विश्व में बिहारियों के समुदाय द्वारा मनाया जाता है।
छठ पूजा के दौरान पूजा के लिए विशेष प्रकार के प्रसाद तैयार किए जाते हैं, जैसे कि थेकुआ, मलपुआ और लाड्डू। इन प्रसादों को बनाने की प्रक्रिया भी बहुत पवित्र मानी जाती है और इसमें केवल महिलाएं ही शामिल होती हैं।
छठ पूजा न केवल एक धार्मिक त्योहार है बल्कि यह बिहार की सांस्कृतिक पहचान भी है। यह त्योहार बिहारियों की एकता, समर्पण और आस्था को दर्शाता है।
बिहार न केवल सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह देश के कुछ सबसे महत्वपूर्ण कृषि और शिल्प उत्पादों के लिए भी जाना जाता है। मुजफ्फरपुर की लीची और भागलपुर का रेशम बिहार की पहचान हैं जो पूरे भारत और विश्व में प्रसिद्ध हैं।
मुजफ्फरपुर की लीची बिहार की सबसे महत्वपूर्ण कृषि उपज में से एक है। यहां की शाही लीची विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसे भारत सरकार ने भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया है। मुजफ्फरपुर की लीची की विशेषता इसके रसीले मांस, छोटे बीज और गुलाबी सुगंध है। यह लीची पौष्टिक तत्वों से भरपूर होती है और इसमें विटामिन C, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अधिक होती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया पर जाएं।
भागलपुर बिहार का "रेशम शहर" कहा जाता है और यह देश के सबसे पुराने रेशम उत्पादन केंद्रों में से एक है। भागलपुर का तुस्सर रेशम (Tussar Silk) अपनी चमक, हल्कापन और टिकाऊपन के लिए प्रसिद्ध है। यहां के भागलपुरी साड़ियां पूरे देश में लोकप्रिय हैं और इन्हें पारंपरिक हाथी कारीगरी के माध्यम से बनाया जाता है। भागलपुर के रेशम को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिला हुआ है, जो इसकी गुणवत्ता और प्रामाणिकता को सुनिश्चित करता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया पर जाएं।